Saturday, April 13, 2024
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Chandauli news:बाल संवाद के दौरान बच्चों ने प्रकट किया पुलिस विभाग को आभार

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चंदौली

• बाल संवाद पुलिस अधिक्षक चंदौली के साथ
• रक्षा बंधन के पावन पर्व पर पुलिस अधिक्षक को रक्षा सुत्र बांध कर प्रकट किया बच्चों ने कृतज्ञता
• बाल संवाद के दौरान बच्चों ने प्रकट किया पुलिस विभाग को आभार |

सेठ एम. आर. जैपुरिया स्कूल्स बनारस पड़ाव शाखा के बच्चों ने एस. पी. चंदौली से किया सीधा संवाद एवं रक्षा सुत्र बांधकर प्रकट किया पुलिस विभाग का आभार जिनके कटिबद्ध सुरक्षा प्रबंधन के कारण जिले के समस्त नागरिक चैन की नींद सो पाते हैं | कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था बच्चों को प्रेरक व्यक्तित्व से मिलवाना जिनसे प्रेरणा लेकर बच्चे अपने स्वर्णिम भविष्य का निर्माण कर सकें विद्यालय अनवरत बच्चों को ऐसे सुअवसर प्रदान करता रहता है |
इस क्रार्यक्रम का आरम्भ पुलिस अधिक्षक अनिल कुमार जी के स्वागत के साथ किया गया | कार्यक्रम के दौरान अपनी जिज्ञासा शांत करने हेतु बच्चों ने पुलिस अधिक्षक अनिल कुमार जी से अनेकानेक प्रश्नों को पूछा जिनका उत्तर एस. पी. चंदौली बड़ी विनम्रता पूर्वक सरल शब्दों में दिया | बच्चों द्वारा पूछे गए-
प्रश्न-1 आपका प्रेरणा स्त्रोत कौन है ? का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि मेरे दादाजी, पिताजी, बड़े पिताजी सभी मेरे जीवन के प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं | मैं आप बच्चों से भी यही कहूँगा कि आपके माता-पिता एवं गुरु से बढ़कर अन्य कोई दूसरा प्रेरक स्त्रोत हो ही नहीं सकता अत: सदैव अपने अभिभावक एवं गुरु का आदर करें और उनका कहना माने |
प्रश्न-2 एक अन्य प्रश्न क्या यू.पी.एस.सी. की परीक्षा बहुत कठिन होती है? का उत्तर देते हए उन्होंने कहा कि कठिनाई का स्तर काफी हद तक हमारी रूचि पर आश्रित होता है जो विषय रुचिकर नही होता पर हमेशा कठिन लगता है किंतु रुचिकर विषय चाहे जितना भी कठिन हो सदैव सरल लगता है |
एक अन्य प्रश्न “हमें किस उम्र से सिविल परीक्षा की तैयारी में लग जाना चाहिए”? का उत्तर देते हुए अनिल कुमार जी ने कहा लक्ष्य प्राप्ति के लिए तैयारी की कोई विशेष उम्र नहीं होती तैयारी सदैव चरण दर चरण होती है | अगले प्रश्न – मनुष्य से गलती होना स्वभाविक है और आपसे भी एस.पी.के पद पर रहते हुए कभी न कभी कोई त्रुटि अवश्य हुई होगी उस स्थिति को आपने कैसे संभाला उत्तर देते हुए अनिल जी ने कहा कि प्रत्येक समस्या का समाधान सकारात्मक नजरिये एवं शांत दिमांग से किया जा सकता है और मैं हमेशा यही करने की कोशिश करता हूँ | इसी क्रम में बच्चों ने एक के बाद एक प्रश्न पूछे जो इस प्रकार है परिस्थिति वश यदि कोई विवश होकर व्यक्ति अनैतिक आचरण करता है तो आप उसे सुधरने का अवसर किस प्रकार उपलब्ध कराते है |
• अपने कार्यभार एवं व्यक्तिगत जीवन के बीच सामंजस्य कैसे संतुलित करते है |
• कार्यक्षेत्रा द्वारा आने वाले मानसिक दवाब को आप कैसे संतुलित करते है |
• यदि आपका कोई वरिष्ठ अधिकारी आप पर अनैतिक कार्य का दवाब बनाता है तो आप उस स्थिति
पर कैसे नियंत्रण पाते है |
• आज के युवावर्ग को कौन –सी जिम्मेदारी को समझने की सबसे ज्यादा आवश्यक है? आदि एस.पी.चंदौली अनिल कुमार जी ने समस्त प्रश्नों का उत्तर बड़ी सरलता पूर्वक देते हुए कहा कि मुझे लगता है कि आज के बच्चे बिल्कुल सही दिशा में अग्रसर है आवश्यक है तो बस अपने द्वारा व्यक्ति किए गए प्रत्येक क्षण का सही ढंग से आकलन करने की | यह देखने की कहीं हमने अपना बहुमूल्य क्षण व्यर्थ के कार्यों में बेकार तो नहीं कर दिया | यदि बच्चे सदैव इस दिशा में चिंतन मनन करते रहेंगे तो उन्हें उनकी मंजिल से कोई भटका नहीं सकता |
बच्चों ने इस अवसर पर वृक्षों को भी रक्षा सुत्र बांध कर पर्यावरण के प्रति भी अपनी कृतज्ञता को व्यक्त किया |

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