Home उत्तर प्रदेश लाइलाज है फाइलेरिया, बचाव ही एक मात्र उपाय

लाइलाज है फाइलेरिया, बचाव ही एक मात्र उपाय

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लाइलाज है फाइलेरिया, बचाव ही एक मात्र उपाय

चंदौली

लाइलाज है फाइलेरिया, बचाव ही एक मात्र उपाय

जरूर करें सर्वजन दवा का सेवन
       किसी भी उम्र में होने से जीवन भर इस रोग के साथ पड़ता है  जीना   


सदर ब्लॉक की मोनिका मौर्या (26) फाइलेरिया से ग्रसित हैं | वह बताती हैं  कि वर्ष 2014 में पता चला कि उनके पैर के सूजन का कारण फाइलेरिया है | मोनिका ने बताया कि 2014 से पहले मेरे पैर में दर्द होता था | घर वालों ने कहा कि गुनगुने पानी और तेल से पैरों को सेकने से ठीक हो जाएगा | साधारण सूजन है जिस कारण छह महीने बीत गए, लेकिन पैर की सूजन और दर्द से आराम नहीं हुआ,तब चिकित्सालय में हुई जांच में पता चला कि पैरों की सूजन और दर्द का कारण फाइलेरिया है | डॉक्टर ने उन्हें दवा दी और पैरों की साफ-सफाई रखने के बारे में जानकारी दी | इसके लिए मलेरिया विभाग ने टब, मग,तौलिया,साबुन,गरम पट्टी दी और फाइलेरिया प्रभावित पैर के व्यायाम के बारे में बताया | यह सब करने से सूजन और दर्द से आराम मिला| वह बताती हैं कि उनकी 11 महीने की बेटी है प्रसव के दौरान फाइलेरिया का दर्द और सूजन बढ़ गयी थी, लेकिन पैरों के व्यायाम और साफ-सफाई के कारण अब ठीक हूँ| ज्यादा चलने और पांच से छह घंटे पैरों को लटकाकर बैठने से दर्द और सूजन बढ़ जाती है| फाइलेरिया से जीवन पर ग्रहण लग गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ वाईके राय ने कहा कि फाइलेरिया बीमारी के प्रति लोग लापरवाही न बरतें और विभाग की ओर से  चलाये जाने वाले अभियान के दौरान फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन जरूर करें  | इससे  फाइलेरिया होने की आशंका ख़त्म हो जाएगी |  फाइलेरिया होने के बाद जिन्दगी भर इस बीमारी के साथ रहना पड़ता है|
जिला मलेरिया अधिकारी पीके शुक्ला ने बताया कि फाइलेरिया एक वेक्टर जनित बीमारी है| इसे हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है |फाइलेरिया संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है| यह मच्छर हमारे घरों के आसपास गंदे पानी व नाली में पाया जाता है| हालांकि यह बीमारी जानलेवा नहीं है,लेकिन इस बीमारी के कारण व्यक्ति के शरीर में विकृति पैदा हो जाती है| उसके बाद व्यक्ति की समाज से दूरी बन जाती है और जिंदगी बोझ सी बन जाती है| सामान्यत यह बीमारी बचपन या युवा अवस्था में ही हो जाती है लेकिन इसके लक्षण पांच से 15 साल बाद नजर आते हैं| तब तक संक्रमित व्यक्ति से समाज के कई और लोग संक्रमित हो जाते हैं|
सहायक मलेरिया अधिकारी राजीव सिंह ने बताया कि यह बीमारी क्यूलेक्स मच्छरों से फैलती है| यदि व्यक्ति पांच साल तक वर्ष में एक बार फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कर लेता है, तो वह फाइलेरिया से बच सकता है| बीमारी से बचाव के लिए हर व्यक्ति को दवा का सेवन करना बहुत जरूरी है| फाइलेरिया लाइलाज बीमारी है इससे बचाव के लिए सिर्फ दो उपाय है, पहला मच्छरों से बचाव और दूसरा फाइलेरिया बचाव की दवा का सेवन| वह कहते हैं कि अभियान के दौरान आशा के सामने फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन जरूर करें| उन्होंने बताया कि जिले में 10 अगस्त से शुरू हुए फाइलेरिया  उन्मूलन अभियान में  20 लाख लक्ष्य के सापेक्ष अब तक तक कुल 11 लाख लोगों को दवा का सेवन कराया जा चुका है| जिले में वर्ष 2021( आईडीए)राउंड में 1354 मरीज चिन्हित हुए थे, जिसमें कुल 832 हाथीपांव के मरीजों का उपचार चल रहा है|
(एएमओ) राजीव सिंह ने बताया अभियान के दौरान लोगों को जागरूक करते बताया जाता है कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है| यदि किसी व्यक्ति को फाइलेरिया है और उसे क्यूलेक्स मच्छर कटता है तो वह मच्छर संक्रमित हो जाता है फिर वही मच्छर जब किसी और को कटता है तो वह व्यक्ति भी फाइलेरिया रोग से संक्रमित हो जाता है| यह मच्छर 10 मीटर के दायरे में मरीजों की तादाद बढ़ा सकता है| इसलिए घर के आसपास साफ- सफाई का विशेष ध्यान रखें| घर के बाहर कहीं भी पानी जमा न होने दें| घर में फाइलेरिया का मरीज हो या न हो सोते समय मच्छरदानी का अवश्य प्रयोग करें|फाइलेरिया पीड़ित व्यक्ति में बुखार, दर्द और पैर के प्रभावित अंग में लालिमा जैसे लक्षण दिखाई देते हैं| यही बाद में हाथी पांव में परिवर्तित हो जाता है|संक्रमित व्यक्ति को हाइड्रोसिल भी हो जाती है| फाइलेरिया से पीड़ित व्यक्ति को समय पर अपना इलाज जरूर कराना चाहिए|

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