Home उत्तर प्रदेश हथकरघा भारत की धरोहर

हथकरघा भारत की धरोहर

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चंदौली। जनपद के हथकरघा बुनकारों के लिए 2008 में दो मिनी कलस्टर दुल्हीपुर एवं एक सिकंदरपुर में केंद्र सरकार से किसी यूनियन नेता ने लागू करवाया। इसके पहले आईसीसीआई हेल्थ कार्ड योजना का लाभ दिलाया ,इससे पहले कोई योजना नहीं आई । क्योंकि 2000 से पहले भारी संख्या में हथकरघा बुनकर चंदौली जनपद में रहते हैं सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी। यही नहीं तत्कालीन प्रधानमंत्री के समक्ष संसद भवन के सभागार में इनके बातों को रखा जिससे नाबार्ड से करोड़ों रुपया माफ हुआ। इनके हालात क्यों नहीं सुधर रहे सरकार से सवाल करने के साथ ही इनके बीच ही तलाशा जा सकता है।लोगों का कहना है चुनाव में इस क्षेत्र में बहुत भाग दौड़ होती है इनके वोट से विधायक,सांसद,बनने वाले कभी इनकी कोई बात विधान सभा या संसद में रखे हों तो बताएं , इस सम्बन्ध में दुल्हीपुर क्षेत्र के बुनकर व क्षेत्र पंचायत सदस्य मुहम्मद मुरसलीन ने बताया की ग्राम सभा भीसौड़ी बुनकर समाज इस वक्त मंदी के हालात से जूझ रहा है बेरोजगारी चरम पर है मंदी के कारण बहुत से लोग पलायन कर सूरत ,बेंगलुरु ,मुंबई लोग जा रहे हैं और यहां के ग्रहस्ता साड़ी की मजदूरी भी नहीं बढ़ा पा रहे हैं भुखमरी के कगार पर आ चुका है बुनकर समाज की सरकार से अपील है कि वह बुनकरों का खास ध्यान दें बुनकरों का एक बजट बनाएं और बुनकरों और बुनकर विभाग से जो बुनकरों के लिए मुद्रा फॉर्म भरे जा रहे हैं वह बैंक वाले कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल देते हैं और कोई भी फॉर्म पास नहीं करते हैं । हमारी सरकार से अपील है कि इस पर ध्यान दे , इसी तरह जुल्फेकार अली ने बताया कि हथकरघा बुनकरों की सबसे बड़ी समस्या मजदूरी ना बढ़ने की है जिसकी वजह से बुनकर मजदूर काफी परेशान है । महंगाई के इस दौर में कम मजदूरी के कारण अपने परिवार को चलाना बहुत ही मुश्किल और कठिन हो रहा है । हथकरघा बुनकर अपने पुश्तैनी काम को छोड़ने पर विवश हैं मजदूरी बढ़ाए जाने के संबंध में पिछले साल बनारस में बुनकर तंजीमों ने बड़े पैमाने पर मीटिंग की जिसमें 20% मजदूरी बढ़ाए जाने की बात कही गई पर आज तक कोई अमल नहीं हुआ है । हथकरघा बुनकरों और देश की अर्थव्यवस्था और संस्कृति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करने के लिए हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। यह अवसर हमारे अतीत में हथकरघा उद्योग के महत्व पर प्रकाश डालता है और इसमें कार्यरत लोगों को अधिक शक्ति प्रदान करता है। इस क्षेत्र में अधिकांश बुनकर महिलाएं हैं, इसलिए यह दिन उनके प्रति हमारी प्रशंसा और समर्थन व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है।

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