Saturday, April 13, 2024
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माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध शिशु के लिए अमृत समान : सीएमओ

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चंदौली

माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध शिशु के लिए अमृत समान : सीएमओ
       प्राकृतिक टीके का भी करता है काम
       कई बीमारियों से शिशु की करता है रक्षा
       विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत गोष्ठी आयोजित
 
माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध शिशु के लिए अमृत के समान तो होता ही है, यह प्राकृतिक टीके का भी काम करता है| यह कई बीमारियों से नवजात की रक्षा भी करता है|विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत शुक्रवार को आयोजित गोष्ठी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ वाईके राय ने यह बात कही |
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय स्थित सभागार में आयोजित गोष्ठी में सीएमओ ने स्तनपान जागरूकता के संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से किये जा रहे प्रयासों की विस्तार से चर्चा की उन्होंने माँ के दूध को अमृत समान बताते हुए उसके गुण की विस्तृत जानकारी दी| उन्होंने कहा कि स्तनपान शिशु के स्वास्थ्य-शारीरिक व मानसिक विकास के लिए जरूरी है| छह माह तक शिशु को सिर्फ और सिर्फ माँ का दूध ही देना है| इस उद्देश को लेकर ही हर वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है | इस वर्ष की थीम “इनऐबल ब्रेस्टफीडिंग-मेकिंग ए डिफरेंस फॉर वर्किंग वूमेन” है|
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आर बी शरण ने कहा कि जन्म के ठीक एक घंटे के भीतर स्तनपान शिशु के लिए बहुत जरूरी होता है| यह शिशु को मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रखता है| माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध,नवजात का पहला प्राकृतिक टीका होता है। माँ के दूध में पाये जाने वाले पोषक तत्व शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं| इसके साथ ही मां का दूध बाल्यावस्था में होने वाली बीमारियों से भी बचाता है| विश्व स्तनपान अभियान को सफल बनाने के लिए जनपद की सभी स्वास्थ्य इकाइयों, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के अंतर्गत समुदाय में एएनएम,स्टाफ नर्स,आशा, आशा संगिनी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से धात्री माताओं, गर्भवती एवं उनके परिजनों को स्तनपान और अनुपूरक आहार के महत्व को लेकर जागरूक व प्रेरित किया जा रहा है|
न्यूट्रिशन इंटरनेशनल की मंडलीय कोऑड्रिनेटर अपराजिता सिंह ने कहा कि नवजात शिशु के लिए स्तनपान पहला टीका होता है| जो महिलाएं नौकरी करतीं है और जिन्हें मैटरनिटी अवकाश के बाद कार्यालय जाना पड़ता है, वह ऐसी स्थिति में डिब्बे के दूध का प्रयोग न कर, अपने दूध को निकाल कर सामान्य वातावरण में आठ और फ्रिज में 24 घंटे रख कर नवजात को पिलवा सकती हैं। स्तनपान से प्रसवोपरांत अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा कम हो जाता है| स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर तथा अंडाशय के कैंसर का खतरा कम हो जाता है| हड्डियों के कमजोर पड़ने का प्रकरण को भी कम करता है साथ ही वजन घटाने में सहयोगी होता है| माँ का दूध शिशु के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण एवं सम्पूर्ण आहार होता है| दूध में पाया जाने वाला कोलोस्ट्रम शिशु को रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है जो शिशु को कई बीमारियों से बचाता है| उन्होंने कहा कि माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए अमृत के समान होता है, जिसे बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर ही शुरू कर देना चाहिए| छह माह तक शिशु को सिर्फ स्तनपान, यहां तक कि पानी तक नहीं देना चाहिए| शिशु को छह माह का होने के बाद ऊपरी आहार देना चाहिए, इसबीच दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्तन में दूध पैदा होना एक नैसर्गिक प्रक्रिया है जब तक बच्चा दूध पीता है तब तक स्तन में दूध बनता है| बच्चे के दूध पीना छोड़ने के पश्चात कुछ समय बाद अपने आप ही स्तन से दूध बनना बंद हो जाता है|
विशेष सावधानी-शिशु को छह माह तक सिर्फ माँ का दूध पिलाना चाहिए| इसके छह माह के बाद स्तनपान के साथ घर का बना तरल,ऊपरी आहार देना शुरू करें|डिब्बे का दूध, बोतल का प्रयोग बिल्कुल न करें| दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है| यदि शिशु को तेज बुखार,दस्त,सर्दी हो और शिशु दूध पी रहा है तो इस स्थिति में भी स्तनपान कराना चाहिए| शिशु को स्तनपान कराना नहीं छोड़ना चाहिए। स्तनपान बंद करने से शिशु को ज्यादा दिक्कत हो सकती है| वह कुपोषण तथा दूसरी अन्य बीमारियों के साथ ही (हाइपोथर्मिया)का शिकार हो सकता है,जिससे शिशु के शरीर का तापमान सामान्य से कम होने की आशंका रहती है| डॉक्टर की सलाह पर बच्चे के खाने पर विशेष ध्यान दें,जिससे वह और दुबला व कमजोर न हो| बच्चे का वजन नियमित रूप से जाँचते रहें,जिससे उसकी विकास की गति का आकलन किया जा सके| गोष्ठी में चिकित्सा अधिकारी एवं सभी ब्लॉक के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक,बीपीएम,बीसीपीएम शामिल हुए|

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